कहानी की शुरुवात होती है सन २०१९ अक्टू बर का महहना गुलाबी मौसम हबहार के मधुबनी गोपाल गंज गााँव में रामलीला मेला की तैयारी हो रही है .. ठाकुर रामनाथ अपने पोते को गााँव का मेला घुमाने लायेहै.. घूमते घूमते एक लाउड स्पीकर पर रामलीला के पहले हिन की शुरुवात होने की घोषणा हो रही है… पोते का ध्यान उस आवाज पे जाती है जो अपने िािा से उसके बारे में पूछे लगता है की ये क्या कह रहे है की आज राम लला का जन्म होने होने वाला है…
ठाकुर रामनाथ कहते है की बेटा राम लला तो कई साल पहले जन्म ले चुके है ये जो कह रहे है वो सीताराम लीला के राम की कह रहे है… पोते के मन में उसे िेखने की उत्सुकता बड़ती है वो अपने िािा के साथ उस तरफ चल िेते है जैसे जैसे वो उस तरफ बढते है बड़े बड़े लाउड स्पीकर पर राम लीला में जन्मे राम के नाम का सोहर गातेहुए लोग एक स्टेज के हकनारे से गा रहे है और स्टेज के एक हकनारे पे राम लला को झूले में जानकी और िशरथ का रूप हलए कलाकार झलू ेको झुला रहेहै… ठाकुर साहब को िेखकर सब उन्हें जगह िेते है वो अपने पोते को लेकर एक खहटया हकनारे बैठ जाते है…