Writer Rajesh Dubeay

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Glimpses of Story :

1} Once a someone asked a Pandit ji : pandit ji, is it possible to marry in same incest ( GOTRA ) ?
Pandit ji replied : if who have same urine path ( MUTRA MARG ) can get married then why can’t in same incest ( GOTRA ) ?
2 } After Judgement of SUPREME COURT OF INDIA regarding IPC 377,
A teen age boy will inform his father that, Papa….I am GAY
A teen age girl will announce that Mummy….I felt in love with a Girl……
Then what will be reaction of these parents towards their such GAY/LESBIAN child. These child will demand their parents to allow them for GAY / LESBIAN MARRIAGE. Only God knows How our Society  will react to it and how will they bare this ? At that time nobody will be in position to explain our children about disadvantages of GAY /  LESBIAN MARRIAGES because our young generation have gotten statutory rights of to have sex in same genders behind close door.
3 } You will not stop yourself to laugh at KARWA CHOUTH when It will be more interesting to see that after GAY MARRIAGE,
Both the sides of net ( CHALNI ) will be mustache men. You will be Speechless to see Girls on both side of net ( CHALNI ) after Lesbian Marriage where family members including parents will be confused in guessing who is HUSBAND & who is WIFE ? Who is breaking whose VRAT if both have same gender in their undergarments ?
4 } Strange but it may be happen if few Special People will demand to have SEX with Dogs, Goats & Cats………….If they claim that it’s their Human Right to FUCK their pet animals then will Supreme Court allow it as IPC 377 that doing personal job in a room is not objectionable ? ? ?



{ Story Line }

Once an intelligent, young handsome boy changes his name from Vjiay Prakash Dixit to JOY.
Name of Joy’s close friend, who is very close to him is JOLLY whose original kundali name is Jawalant Bahadur Singh.
This is story of two young friends i.e. JOY & JOLLY
Their friendship grow into love and their love forces them not to live without each other. They decide to spend their whole life together forever………………. and they decide to get married.
The story of our film takes an adventurous turn that parents of JOY & JOLLY get angry with their idiotic decision and try to make them understand that
 GAY MARRIAGE is not possible in our society.
 On other side, JOY & JOLLY ask their parents
why GAY MARRIAGE is impossible.
Lots of social reasons, orthodox statement, intellectual quotes,mythological examples,succes stories,
human rights, statutory rights, duties,responsibility blah blah blah blah so many topics  comes to discussion in support & oppose of GAY MARRIAGE from both parties.
After so many discourse & counter fights, JOY & JOLLY decided to marry with each other without permission of parents or society.

Climax of the film

is that they will marry &
Nothing in this World can stop them marrying with each other. The families of both sides are also become stubborn  at their decision that YE SHADI NAHI HO SAKTI MATLAB NAHI HO SAKTI.
They declared that if JOY & JOLLY will try to get marry with each other…. then both the families will do group suicide, AGAR YE SHADI HOGI TO DONO PARIVARO KE LAASH PAR HI HO SAKTI HAI as they can’t let anyone spoil prestige & tradition of their great families.
They can’t let anyone put stain on prestige of families at any cost.
Lovers burning in the fire of SEX decide not to let their families Suicide but also they decide not to let their love fail.
What will they do then ?
JOY & JOLLY, both Gay partners decided to be with each other not only in one life but in all seven births as lovers says YAH BANDHAN SIRF ISI JANM KA NAHI, AGLE SAAT JANMO KA HAI…
They cut veins of each other and let their love win. IS JALIM DUNIYA NE IS JANAM ME NAHI MILNE DIYA TO KYA HUA, HUM AGLE JANAM ME MILENGE…..
The story again take a turn as the families save their Gay Champions from dying.
After getting back from death to life…..
These two hard core Gay Partner……JOY & JOLLY not change their decision.
After all obstacles & barriers, parents of these two Gay Partner agree for their GAY MARRIAGE on Terms & Condition……… According to which they demand JOY & JOLLY for daughter-in-law.
What the FUCK………….Daughter-in-law……………..
How is it possible as they are Gay !!!
Another crucial terms from Senior family members of JOY & JOLLY demand for child to run descendant ( VANSH ) of both family.
They accept terms and conditions of marriage applied by their families.
On the basic principal of BAS YAHI APRADH MAI HAR BAR KARTA HU, AADMI HU AADMI SE PYAR KARTA HU….The climax of our film story is much more interesting.
 JOY & JOLLY , These two  gay partners get marriage and according to Terms & Conditions,
They bring daughter-in-laws for their mothers.
They produce children to run descendant.
You must be thinking how can two men bring daughter-in-laws after getting married to each other ?
You must be thinking how ridiculous this is ?
How can two gay produce children to run descendant ?
Friends…….. this is only USP of our film, which will not let you get bored.
Message of our film DIL LAGA GADHE SE, TO PARI KYA CHEEZ HAI is that
If your love is true then you can do everything
Love can be blind but can’t be infertile.
This film is full of loud family drama & silent punching humour with promise of giving 3 things to audience is…..




दिल लगा गधे से

तो परी क्या चीज हैं।।।


जब दिल की ख्वाहिशें जवां होती हैं,

तब मोहब्बत के अफसानें लिखे जाते हैं।

दिल चाहता हैं किसी और के दिल को,
दिल मांगता हैं अपनी दिल रुबा की चाहत को

और दिल की इस चाहत की राह में दुश्मन हजार होते हैं।

ये आम बात हैं की एक लड़के का दिल किसी लड़की के लिए धड़कता हैं।
ये खास बात हैं की कोई लड़की अपने सपनों का राजकुमार किसी लड़के में देखती हैं।

इसी चाहत की तलब  में किसी का दिल गधी पर आ जाये तो परी क्या चीज हैं


मजा तो तब आता हैं जब किसी लँगूर आशिक को अंगूर जैसी हसीना मिल जाये।

यहां तक तो ठीक हैं लेकिन जब दिल मांगे कुछ “और” के चक्कर में

जब कोई लड़का किसी लड़के से प्यार करने लगे तो ………


 यूँ कहे की कोई लड़का किसी लड़के से शादी करके घर बसाना चाहे तो समाज से एक ही आवाज उठती हैं की ,

 ” ये कैसी चाहत हैं ?

 ये कैसी मोहब्बत हैं ?

क्या प्यार करने के लिए कोई लड़की नही मिली ?

 ये पागलपन हैं ।

 ये कोई मानसिक रोग हैं।

अरे भाई ये तो सेक्शन 377 के तहत अपराध हैं ।”

सच्चा प्यार करने वाला भी कहता हैं की सदियों से मोहब्बत का रहा हैं दुश्मन जमाना, भले ही लड़का लड़की प्यार करे या एक लड़का किसी लड़के से या कोई लड़की किसी लड़की से ………..

प्यार की खिलाफत होती आई हैं और हीर राँझा,रोमियो जूलिएट,लैला मजनू जैसे लाखो आशिकों की जिंदगी फ़ना होती रही हैं ।

यही से शुरू होती हैं हमारी फ़िल्म की कहानी

दिल लगा गधे से

तो परी क्या चीज है !!!
इसे दूसरे शब्दों में ये दूसरे अर्थों में किसी और असामाजिक, अनैतिक, अप्राकृतिक सन्दर्भ में  कहे तो, इसी तरह गया सकते है कि……….
बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ,

आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ !!!

पढ़ा लिखा सुंदर समझदार नवयुवक जयशंकर कुमार आधुनिकता की होड़ में अपना नया नामकरण जॉय रख लेता हैं और ज्वलन्त प्रसाद उर्फ़ जॉली नाम के लड़के से उसकी दोस्ती हो जाती हैं और ये दोस्ती प्यार में बदल जाती हैं और ये प्यार उन्हें एक दिन ये महसूस करने के लिए मजबूर करती हैं की अब हम दोनों एक दूसरे के बिना नही रह सकते।

 तन और मन से एक दूसरे में समा चुके ये दोनों आशिको की आशिकी यही नही खत्म होती।

मुहब्बत की ये आग इस कदर और सुलगती हैं  की दोनों शादी करने का फैसला करते हैं।

हमारी फ़िल्म की कहानी यही एक रोचक मोड़ लेती हैं की उन दोनों के इस बेतुके फैसले से जॉय और जॉली के परिवार वाले बुरी तरह से खफा हो जाते हैं और उन्हें सैकड़ों दलील देकर समझाते हैं की

ये शादी नही हो सकती।


ये शादी क्यों नही हो सकती हैं ?

 जॉय और जॉली भी हजार दलील देकर अपने परिवार को समझाते हैं कि

चाहे कुछ भी हो जाये
वो दोनों शादी करेंगे


दुनिया की कोई भी ताकत उनके फैसले को नही बदल सकती।

दोनों परिवार के लोग भी इतनी आसानी से कहाँ हार मानने वाले थे। उन लोगों ने आखिरी इमोशनल  दांव खेला की अगर ये शादी होगी तो दोनों परिवार के सभी सदस्य सामूहिक आत्म हत्या कर लेंगे लेकिन अपने जीते जी खानदान आन बान शान की माँ की आँख नही होने देंगे।

किसी भी कीमत पर अपने जीते जी परिवार की इज़्ज़त पर दाग नही लगने देगे।

मुहब्बत की आग में सुलग रहे दो गे प्रेमी भी उनके इमोशनल अत्याचार के सामने न झुकते हुए फैसला करते हैं की न अपने परिवार को आत्महत्या करने देगे और न ही अपनी मुहब्बत को हारने देगे।

फिर करेंगे क्या ?

जॉय और जॉली एक जन्म तो क्या सात जन्म तक साथ निभाने का वादा करते हुए एक दूसरे की कलाई की नस काट कर आत्महत्या कर लेते हैं।

हमारी कहानी फिर यहां एक नया मोड़ लेती हैं। दोनों परिवार वाले अपने बच्चों को मरने से बचा लेते हैं। लेकिन मौत के मुंह से लौटे जॉय और जॉली फिर भी अपनी जिद्द से टस से मस् नही होते हैं।
दोनों बच्चों की जिद्द के आगे झुकते हुए दोनों परिवार उन दोनों को गे मैरिज करने की इजाजत इस शर्त पर देते हैं कि

-हमें बहु चाहिए भले ही तुम दोनों लड़के शादी करो।

-हमे वंश बढ़ाने के लिए नाती पोते चाहिए भले ही तुम दोनों मर्द शादी करो।

प्यार झुकता नही टूट भले ही जाये लेकिन जॉय और जॉली का सच्चा प्यार झुकना तो दूर की बात वो टूटता भी नहीं हैं

जॉय और जॉली अपने परिवार की शर्त स्वीकार कर लेते हैं।

बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ,

आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ ” 

की सबसे बड़ी बात जो हैं वो हैं कहानी का क्लाइमेक्स  की जॉय और जॉली गे मैरिज करते हैं क्यों की उनका प्यार सच्चा हैं और एक आज्ञाकारी बेटे का कर्तव्य निभाते हुए  शर्त के अनुसार

अपनी अपनी माँ को बहु भी देते हैं
वंश चलाने के लिए बच्चे भी पैदा करते हैं।

आप सोचेगे की दो मर्द शादी करके बहु कैसे ला सकते हैं ?

आप कहेंगे की ये क्या बकवास हैं की दो मर्द शादी करके अपने खानदान का वंश चलाने के लिए बच्चे कैसे पैदा कर सकते हैं ?

दोस्तों,हमारी फ़िल्म की यही तो USP हैं जो आपको फ़िल्म देखते समय बिलकुल बोर नही होने देगी।

फ़िल्म “दिल लगा गधे से तो परी क्या चीज है ”  का सन्देश ही यही हैं कि

प्यार सच्चा हो तो कुछ भी हो सकता हैं।प्यार अँधा हो सकता हैं लेकिन बाँझ तो बिलकुल नही हो सकता ।।।

मनोरंजन और हास्य के ताने बाने में बुनी हुई यह फ़िल्म अपने दर्शकों से सिर्फ 3 चीजों का पक्का वादा करती हैं और वो हैं

पैसा वसूल मनोरंजन और वो भी परिवार के साथ बिना किसी अश्लील दृश्य के ……………
फ़िल्म कांसेप्ट : राजेश दुबेय
Bound Script of Hindi Film DIL LAGA GADHE SE TO PARI KYA CHEEZ HAI is registered in Film Writers Association, Mumbai

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